अन्नप्राशन मुहूर्त

अन्नप्राशन सिर्फ़ शुक्ल पक्ष में किया जाता है। परंपरा में लड़के के लिए सम (even) महीने और लड़की के लिए विषम (odd) महीने चुने जाते हैं — आम तौर पर छठे महीने के आस-पास।

मुहूर्त निकाले जा रहे हैं…
ये सामान्य शुभ दिन हैं। असली मुहूर्त में आपकी (और विवाह में दोनों की) कुंडली, चंद्र की स्थिति और चंद्राष्टम भी देखा जाता है — वह बिना जन्म विवरण के हो ही नहीं सकता। इन दिनों में से आपके लिए कौन सा सही है, यह ज्योतिषी तय करते हैं।

हर दिन के साथ “यह दिन क्यों चुना गया” खोल कर देखिए — उसमें हर नियम का नाम और उसका मान दिया है, ताकि आप इसे अपने पंचांग से मिला सकें। जो गणना जाँची न जा सके, वह भरोसे के लायक नहीं होती।

सारा हिसाब इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर कहीं भेजा नहीं जाता।

यह पन्ना क्या बताता है

यह बच्चे के पहले अन्न — अन्नप्राशन — के शुभ दिन बताता है, आपके शहर के लिए, वजह के साथ।

दिन कैसे चुना जाता है

पंद्रह शुभ नक्षत्र माने गए हैं — अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाति, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। वार सोम, बुध, गुरु, शुक्र। और एक शर्त यहाँ ख़ास है: सिर्फ़ शुक्ल पक्ष लिया जाता है — बढ़ते हुए चंद्र का समय, क्योंकि यह संस्कार बच्चे के पोषण और बढ़ने से जुड़ा है।

नतीजा कैसे पढ़ें

रिक्ता तिथि (4, 9, 14) और अमावस्या वैसे ही हट जाती हैं, और शुक्ल पक्ष की शर्त के बाद बचे दिनों में से ही चुनाव होता है — इसलिए यहाँ दिन कम मिलते हैं, और वह जान-बूझकर है। दिन के साथ उस दिन का शुभ समय भी दिया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अन्नप्राशन किस उम्र में होता है?

परंपरा अक्सर 6 महीने के आस-पास कहती है — लड़के के लिए सम महीने और लड़की के लिए विषम महीने का रिवाज़ कई जगह है। अपने परिवार का रिवाज़ देखिए।

कृष्ण पक्ष में क्यों नहीं?

क्योंकि यह संस्कार बढ़ने से जुड़ा है, और परंपरा उसके लिए बढ़ते हुए चंद्र का समय चुनती है। यही शर्त मुंडन पर भी लगती है।

दिन कम दिख रहे हैं?

हाँ, और वह जान-बूझकर है। शुक्ल पक्ष की शर्त आधे दिन पहले ही हटा देती है। कम दिन दिखाना ग़लत दिन दिखाने से बेहतर है।

दूसरे मुहूर्त

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