मासिक राशिफल
महीने का रंग दो चीज़ों से बनता है: अभी ग्रह कहाँ हैं, और इस महीने कौन राशि बदल रहा है। दोनों नीचे नापकर दिए गए हैं।
अपनी राशि चुनिए
Ye चंद्र राशि है — जन्म के समय चंद्र जिस राशि में था। पाश्चात्य पद्धति की सूर्य-राशि उससे अलग होती है। पता न हो तो फ्री कुंडली से निकाल लीजिए।
इस पाठ में कौन से ग्रह आते हैं
महीने के पाठ में पाँच ग्रह आते हैं — सूर्य, मंगल, शुक्र, बुध और गुरु।
सूर्य ठीक एक महीने में एक राशि बदलता है, इसलिए मासिक पाठ में वही ढाँचा देता है। बुध और शुक्र भी इस अवधि में लगभग एक बार राशि बदलते हैं।
इसके साथ यह भी दिया जाता है कि इस महीने कौन सा ग्रह राशि बदल रहा है और किस तारीख़ को — क्योंकि महीने का असली मोड़ वही होता है, रोज़ का उतार-चढ़ाव नहीं।
बारह राशि
अपनी राशि ऊपर चुनिए। शनि का दौर अलग से देखना हो तो हर राशि का अपना पन्ना है:
- मेष की साढ़े साती
- वृषभ की साढ़े साती
- मिथुन की साढ़े साती
- कर्क की साढ़े साती
- सिंह की साढ़े साती
- कन्या की साढ़े साती
- तुला की साढ़े साती
- वृश्चिक की साढ़े साती
- धनु की साढ़े साती
- मकर की साढ़े साती
- कुंभ की साढ़े साती
- मीन की साढ़े साती
Aksar poochhe jaane wale sawaal
मासिक राशिफल किस चीज़ से बनता है?
दो चीज़ों से। पहला, अभी पाँच ग्रह — सूर्य, मंगल, शुक्र, बुध और गुरु — आपकी राशि से कौनसे भाव में हैं। दूसरा, इस महीने उनमें से कौन राशि बदल रहा है और किस तारीख़ को। महीने का असली मोड़ दूसरी बात से आता है।
महीना कब से गिना जाता है — 1 तारीख़ से?
नहीं, आज से अगले 30 दिन। ग्रहों का राशि बदलना कैलंडर की 1 तारीख़ से नहीं जुड़ा, इसलिए 1 से 30 तक गिनना बनावटी सीमा है।
इसमें शनि क्यों नहीं है?
क्योंकि शनि एक राशि में ढाई साल रहता है — एक महीने में वह लगभग हिलता ही नहीं। उसका असर देखना हो तो वार्षिक राशिफल या साढ़े साती का पन्ना देखिए, जहाँ वह मुख्य है।
सूर्य का राशि बदलना क्यों मायने रखता है?
क्योंकि सूर्य ठीक एक महीने में एक राशि बदलता है — यही मासिक पाठ का ढाँचा है। उस तारीख़ के आस-पास महीने का ज़ोर एक भाव से दूसरे भाव पर चला जाता है।
