सूर्य राशि कैलकुलेटर
आपकी सूर्य राशि के दो जवाब होते हैं, और दोनों सही हैं — अलग पद्धति में। यहाँ दोनों दिए जाते हैं, छुपाया एक भी नहीं।
यह कैलकुलेटर क्या बताता है
यह आपकी सूर्य राशि दोनों पद्धतियों में देता है — वैदिक (निरयन) और पाश्चात्य (सायन)। दोनों अक्सर अलग आते हैं, और वह ग़लती नहीं है; वे दो अलग नाप हैं।
हिसाब कैसे होता है
सूर्य की असली स्थिति जन्म के समय के लिए निकाली जाती है। पाश्चात्य पद्धति उसी को सीधा 30° के खंडों में बाँट देती है। वैदिक पद्धति उसमें से लाहिड़ी अयनांश घटाती है — अभी वह करीब 24° है। इसी अंतर की वजह से ज़्यादातर लोगों की वैदिक सूर्य राशि पाश्चात्य से एक राशि पीछे निकलती है।
नतीजा कैसे पढ़ें
दोनों जवाब साथ दिए जाते हैं, एक छुपाया नहीं जाता। एक ज़रूरी बात: भारतीय ज्योतिष में “राशि” का मतलब आम तौर पर चंद्र राशि होता है, सूर्य नहीं। इसलिए अगर कोई आपसे “राशि” पूछे, तो वह शायद चंद्र राशि माँग रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरी राशि बदल क्यों गई?
बदली नहीं — दो पद्धतियाँ हैं। अयनांश का अंतर करीब 24° है, और राशि 30° की। इसलिए अगर आपका सूर्य राशि के शुरू में है तो वैदिक में वह पिछली राशि में चला जाता है।
कौनसी सही है?
दोनों अपनी-अपनी पद्धति में सही हैं। वैदिक पाठ के लिए निरयन, पाश्चात्य पाठ के लिए सायन। एक को दूसरे में मिला देना ग़लत है।
सूर्य राशि कितनी ज़रूरी है?
वैदिक पद्धति में वह पिता, आत्म-विश्वास और प्रतिष्ठा का संकेत देती है — पर कुंडली का मुख्य आधार लग्न और चंद्र राशि हैं।
