भूमि पूजन मुहूर्त

निर्माण शुरू करने के लिए पंचक और चातुर्मास दोनों छोड़े जाते हैं — परंपरा में ये दोनों अवधि नींव रखने के लिए ठीक नहीं मानी जातीं।

मुहूर्त निकाले जा रहे हैं…
ये सामान्य शुभ दिन हैं। असली मुहूर्त में आपकी (और विवाह में दोनों की) कुंडली, चंद्र की स्थिति और चंद्राष्टम भी देखा जाता है — वह बिना जन्म विवरण के हो ही नहीं सकता। इन दिनों में से आपके लिए कौन सा सही है, यह ज्योतिषी तय करते हैं।

हर दिन के साथ “यह दिन क्यों चुना गया” खोल कर देखिए — उसमें हर नियम का नाम और उसका मान दिया है, ताकि आप इसे अपने पंचांग से मिला सकें। जो गणना जाँची न जा सके, वह भरोसे के लायक नहीं होती।

सारा हिसाब इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर कहीं भेजा नहीं जाता।

यह पन्ना क्या बताता है

यह निर्माण शुरू करने — भूमि पूजन — के शुभ दिन बताता है, आपके शहर के लिए, वजह के साथ।

दिन कैसे चुना जाता है

शुभ नक्षत्र तेरह माने गए हैं — रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। वार सोम, बुध, गुरु, शुक्र। रिक्ता तिथि और अमावस्या हट जाती हैं। निर्माण शुरू करने के लिए पंचक और चातुर्मास दोनों छोड़े जाते हैं — गृह प्रवेश की तरह, क्योंकि दोनों में नींव रखने को अनुकूल नहीं माना गया।

नतीजा कैसे पढ़ें

दिन के साथ शुभ समय भी मिलता है, आपके शहर के सूर्योदय से। भूमि पूजन में परंपरा दिशा और वास्तु का भी विचार करती है — वह इस पन्ने का हिस्सा नहीं है, और वह बात छुपाई नहीं जानी चाहिए। यहाँ सिर्फ़ समय का हिस्सा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भूमि पूजन और शिलान्यास एक ही हैं?

रिवाज़ के हिसाब से थोड़ा अलग हैं — भूमि पूजन भूमि की पूजा है, शिलान्यास पहला पत्थर रखना। मुहूर्त की जाँच दोनों के लिए लगभग एक जैसी है।

पंचक में नींव क्यों नहीं रखी जाती?

परंपरा मानती है कि उस दौर में शुरू किया काम बार-बार दोहराना पड़ सकता है। इसलिए निर्माण और गृह प्रवेश दोनों उसमें नहीं किए जाते।

मुहूर्त निकल गया तो क्या करें?

अगला शुभ दिन देख लीजिए — सूची आगे के दिनों की भी है। किसी भी दिन जल्दबाज़ी में शुरू करना परंपरा का सुझाव नहीं है।

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