कुंडली मिलान — अष्टकूट 36 गुण मिलान

दोनों के जन्म विवरण से वास्तविक चंद्र स्थिति निकालकर पूरा अष्टकूट मिलान — आठों कूट, मंगल दोष, और शास्त्र के अपने दोष परिहार के साथ। हर कूट पर केवल अंक नहीं: वह कूट है क्या, इस कुंडली में क्या निकला, क्यों निकला, क्या असर बतलाया गया है, और आवश्यकता हो तो उपाय।

जन्म समय जितना निश्चित हो, मिलान उतना ही सही। चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग एक दिन रहता है, पर नक्षत्र की संधि पर जन्मे व्यक्ति का नक्षत्र घंटों में बदल जाता है — और उसके साथ सारे आठ कूट बदल जाते हैं। अनुमान का समय भरना मिलान को बेकार कर देता है, इसलिए जितना ठीक याद हो उतना ही भरिए।

वर (लड़का)

कन्या (लड़की)

मिलान के बाद क्या?

अष्टकूट दोनों की पूरी कुंडली नहीं देखता — दशा, सप्तमेश, और सातवें भाव का मेल इसमें सम्मिलित नहीं है। गंभीर निर्णय से पहले पूरी कुंडली का मिलान कराना चाहिए।

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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए?

परंपरा के अनुसार 36 में से 18 या उससे अधिक अंक को विवाह के लिए स्वीकार्य माना जाता है। 25 से 31 उत्तम और 32 से 36 श्रेष्ठ माना जाता है। ध्यान रहे कि 18 की सीमा एक प्रथा है, कोई शास्त्रीय नियम नहीं — इसलिए अंक के साथ हर कूट का कारण देखना ज़रूरी है।

नाड़ी दोष क्या है और क्या इसका परिहार होता है?

दोनों का जन्म नक्षत्र एक ही नाड़ी वर्ग (आदि, मध्य या अंत्य) में होने पर नाड़ी दोष बनता है और 8 में से 0 अंक मिलते हैं। शास्त्र में इसके परिहार भी बताए गए हैं — जैसे एक ही नक्षत्र में अलग-अलग चरण होना, एक ही राशि में अलग नक्षत्र होना, या दोनों राशियों के स्वामी ग्रहों का आपस में मित्र होना।

दोनों मांगलिक हों तो क्या होता है?

शास्त्र में यही सबसे मान्य परिहार है — दो मांगलिक कुंडलियों का मंगल दोष आपस में कट जाता है। दोष तभी ध्यान माँगता है जब वह एक तरफ हो और दूसरी तरफ न हो।

कुंडली मिलान के लिए जन्म समय कितना ज़रूरी है?

बहुत ज़रूरी। पूरा अष्टकूट चंद्रमा की स्थिति पर टिका होता है। नक्षत्र की संधि पर जन्मे व्यक्ति का नक्षत्र कुछ ही घंटों में बदल जाता है, और उसके साथ आठों कूट बदल जाते हैं।