गृह प्रवेश मुहूर्त
गृह प्रवेश में पंचक और चातुर्मास दोनों छोड़े जाते हैं। दोनों गणित से निकलते हैं, किसी तय सूची से नहीं — इसलिए हर दिन खुद जाँचा जाता है।
हर दिन के साथ “यह दिन क्यों चुना गया” खोल कर देखिए — उसमें हर नियम का नाम और उसका मान दिया है, ताकि आप इसे अपने पंचांग से मिला सकें। जो गणना जाँची न जा सके, वह भरोसे के लायक नहीं होती।
सारा हिसाब इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर कहीं भेजा नहीं जाता।
यह पन्ना क्या बताता है
यह नए घर में प्रवेश — गृह प्रवेश — के शुभ दिन बताता है, आपके शहर के लिए, और हर दिन के साथ उसकी वजह भी।
दिन कैसे चुना जाता है
शुभ नक्षत्र दस माने गए हैं — रोहिणी, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, धनिष्ठा और शतभिषा। वार सोम, बुध, गुरु, शुक्र। रिक्ता तिथि और अमावस्या हट जाती हैं। इसके अलावा दो दौर ख़ास तौर पर छोड़े जाते हैं: चातुर्मास और पंचक। पंचक में गृह प्रवेश नहीं किया जाता — वह यहाँ अपने आप हटाया जाता है।
नतीजा कैसे पढ़ें
दिन के साथ उस दिन का शुभ समय भी मिलता है — अभिजित और शुभ चौघड़िया, आपके शहर के सूर्योदय से निकाले गए। गृह प्रवेश में समय उतना ही मायने रखता है जितना दिन, इसलिए दोनों साथ देखिए। ये सामान्य दिन हैं; घर के स्वामी की कुंडली देखकर ज्योतिषी इनमें से एक चुनते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पंचक क्या है और उसमें क्यों नहीं?
जब चंद्र धनिष्ठा के दूसरे चरण से रेवती तक के पाँच नक्षत्रों में होता है, उसे पंचक कहते हैं। परंपरा उस दौरान निर्माण और गृह प्रवेश से बचने को कहती है।
किराए के घर में भी मुहूर्त चाहिए?
परंपरा नए घर में पहली बार रहने जाने पर मुहूर्त देखती है — अपना हो या किराए का, रिवाज़ वही है। कितना मानना है, वह आपका फ़ैसला है।
घर तैयार नहीं है, फिर भी प्रवेश कर सकते हैं?
परंपरा अधूरे घर में प्रवेश से रोकती है। यह पन्ना सिर्फ़ दिन बताता है — घर की तैयारी उसका हिस्सा नहीं है।
