आज की तिथि

तिथि चंद्र और सूर्य के बीच के 12 डिग्री के अंतर से बनती है — इसलिए वह घड़ी के दिन से मेल नहीं खाती, और उसका अंत हर दिन अलग समय पर होता है।

पंचांग बना रहे हैं…

यह पन्ना क्या बताता है

यह आज की तिथि बताता है — उसका नाम, पक्ष, और वह कब तक रहेगी। तिथि पंचांग का पहला अंग है और व्रत, त्योहार और मुहूर्त सभी इसी पर टिकते हैं।

हिसाब कैसे होता है

तिथि सूर्य और चंद्र के कोण के अंतर से बनती है। उस अंतर को 12° के टुकड़ों में बाँटा जाता है — पूरे चक्कर में 30 टुकड़े, यानी 30 तिथि। पहली 15 शुक्ल पक्ष (अमावस्या से पूर्णिमा तक, चंद्र बढ़ता हुआ) और अगली 15 कृष्ण पक्ष (पूर्णिमा से अमावस्या, घटता हुआ)।

कैसे पढ़ें

तिथि के साथ उसके ख़त्म होने का समय भी दिया जाता है — और वही सबसे काम की चीज़ है। तिथि 24 घंटे की नहीं होती: चंद्र की गति बदलती है, इसलिए कोई तिथि 19 घंटे की हो सकती है और कोई 26 की। इसीलिए एक ही दिन में दो तिथि पड़ सकती हैं, या एक तिथि दो दिन छू सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मेरी तिथि दूसरे पंचांग से अलग क्यों है?

क्योंकि गिनने का तरीक़ा अलग हो सकता है। कुछ परंपराएँ सूर्योदय के समय चल रही तिथि को उस दिन की तिथि मानती हैं, कुछ उस क्षण की। दोनों ग़लत नहीं हैं — रिवाज़ अलग है।

तिथि क्षय और वृद्धि क्या है?

अगर कोई तिथि किसी सूर्योदय को छुए ही नहीं, वह क्षय (लुप्त) कहलाती है। और अगर वह दो सूर्योदय छू ले, तो वृद्धि। दोनों सामान्य हैं — चंद्र की गति के कारण।

व्रत के लिए कौनसी तिथि लें?

व्रत के लिए स्थानीय परंपरा देखिए — वह अक्सर सूर्योदय वाली तिथि गिनती है, और सूर्योदय जगह से बदलता है। यह पन्ना गणित बताता है, व्रत का निर्णय नहीं।

सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं; राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं। यह जानकारी मार्गदर्शन के लिए है, किसी नतीजे का वादा नहीं।

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