मुंडन मुहूर्त
परंपरा में मुंडन विषम (odd) वर्ष में होता है — पहले, तीसरे या पाँचवें साल में — और सिर्फ़ शुक्ल पक्ष में।
हर दिन के साथ “यह दिन क्यों चुना गया” खोल कर देखिए — उसमें हर नियम का नाम और उसका मान दिया है, ताकि आप इसे अपने पंचांग से मिला सकें। जो गणना जाँची न जा सके, वह भरोसे के लायक नहीं होती।
सारा हिसाब इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर कहीं भेजा नहीं जाता।
यह पन्ना क्या बताता है
यह बच्चे के पहले बाल उतरने — मुंडन (चूड़ाकर्म) — के शुभ दिन बताता है, आपके शहर के लिए।
दिन कैसे चुना जाता है
यहाँ जाँच सबसे कड़ी है। सिर्फ़ बारह शुभ नक्षत्र माने गए हैं — अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती। तिथि भी कम हैं: 1, 2, 4, 6, 9, 10 और 12। वार सोम, बुध, गुरु, शुक्र। और अन्नप्राशन की तरह सिर्फ़ शुक्ल पक्ष लिया जाता है।
नतीजा कैसे पढ़ें
इतनी शर्तें एक साथ लगने से दिन काफ़ी कम हो जाते हैं — कभी महीने में सिर्फ़ दो-तीन। यह कमी नहीं, नियम का नतीजा है। दिन के साथ उस दिन का शुभ समय भी मिलता है, आपके शहर के सूर्योदय से।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मुंडन किस उम्र में होता है?
परंपरा अक्सर पहले, तीसरे या पाँचवें साल में कहती है — विषम साल का रिवाज़ आम है। कई परिवार कुल-देवता के स्थान पर करते हैं, तब वहाँ का रिवाज़ चलता है।
इतने कम दिन क्यों?
क्योंकि बारह नक्षत्र, सात तिथि, चार वार और शुक्ल पक्ष — चारों शर्तें एक साथ लगती हैं। हर शर्त आधा कैलेंडर काट देती है।
ज्येष्ठा नक्षत्र शुभ है?
मुंडन के लिए इस सूची में हाँ। हर संस्कार की अपनी सूची होती है — जो नक्षत्र एक काम के लिए शुभ है, वह दूसरे के लिए ज़रूरी नहीं।
