मंगल दोष कैलकुलेटर

मंगल दोष का मतलब “विवाह नहीं होगा” नहीं है। शास्त्रीय ग्रंथ इसे एक विचार मानते हैं जो 36 गुण के साथ देखा जाता है — अकेला फ़ैसला नहीं। और उन्हीं ग्रंथों में इसकी कई छूट भी लिखी हैं।

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यह कैलकुलेटर क्या बताता है

यह जाँचता है कि आपकी कुंडली में मंगल दोष है या नहीं — और अगर है, तो किस आधार पर। साथ में वह शास्त्रीय छूट भी बताई जाती है जो परंपरा खुद देती है, क्योंकि आधा जवाब देना ग़लत जवाब देने जैसा ही है।

हिसाब कैसे होता है

मंगल की राशि निकालकर देखा जाता है कि वह लग्न से किस भाव में है, और चंद्र राशि से किस भाव में। शास्त्रीय दोष भाव हैं 1, 2, 4, 7, 8 और 12। दोनों में से किसी एक से भी मंगल इन भावों में हो तो दोष माना जाता है। उसके बाद छूट जाँची जाती है: मंगल अपनी राशि (मेष या वृश्चिक) में हो, या गुरु की दृष्टि हो।

नतीजा कैसे पढ़ें

नतीजे के साथ वजह भी लिखी होती है — किस आधार से, किस भाव में। उच्च का मंगल (मकर) छूट में नहीं गिना जाता; वह मंगल को मज़बूत करता है, कमज़ोर नहीं — और यह बात छुपाई नहीं जाती। मंगल दोष अकेला विवाह का फ़ैसला नहीं है; वह 36 गुण के साथ देखा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मांगलिक होने का मतलब विवाह नहीं होगा?

नहीं। शास्त्रीय ग्रंथ इसे एक विचार मानते हैं, रोक नहीं। उन्हीं ग्रंथों में इसकी कई छूट भी लिखी हैं। जो लोग इसे अंतिम फ़ैसला बताकर डर बेचते हैं, वे शास्त्र नहीं बेच रहे।

लग्न से देखें या चंद्र से?

परंपरा दोनों का इस्तेमाल करती है, इसलिए यहाँ दोनों जाँचे जाते हैं और दोनों का नतीजा अलग-अलग दिखाया जाता है।

दो मांगलिकों का विवाह ठीक होता है?

यह एक प्रचलित मान्यता है। पर इसे नियम मानकर चलना ठीक नहीं — पूरी कुंडली, 36 गुण और दोनों की दशा देखे बिना कोई भी निष्कर्ष अधूरा है।


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