आत्मकारक और दारकारक कैलकुलेटर
चर कारक डिग्री के क्रम से तय होते हैं — जिस ग्रह की अपनी राशि में डिग्री सबसे ज़्यादा हो वह आत्मकारक। यह जैमिनी पद्धति का आधार है।
यह कैलकुलेटर क्या बताता है
यह आपके आठों चर कारक निकालता है — आत्मकारक से दाराकारक तक। जैमिनी पद्धति में ये ग्रह अपनी राशि के हिसाब से नहीं, अपनी डिग्री के हिसाब से भूमिका पाते हैं।
हिसाब कैसे होता है
आठ ग्रह लिए जाते हैं — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु। केतु इस पद्धति में नहीं आता। हर एक की अपनी राशि के अंदर की डिग्री देखी जाती है, और सबसे ज़्यादा डिग्री वाला आत्मकारक बनता है। एक ज़रूरी नियम: राहु उलटा गिना जाता है — 30 में से उसकी डिग्री घटाकर, क्योंकि वह उलटा चलता है।
नतीजा कैसे पढ़ें
क्रम ही सब कुछ है: पहला आत्मकारक (आत्मा), दूसरा अमात्यकारक (कर्म), और आगे भ्रातृ, मातृ, पितृ, पुत्र, ज्ञाति, दारा। आत्मकारक पूरी जैमिनी गणना की नींव है — उसी से कारकांश बनता है। इसलिए एक ग़लती यहाँ आगे सब कुछ ग़लत कर देती है, और राहु का उलटा हिसाब छोड़ना सबसे आम ग़लती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
केतु का कारक क्यों नहीं होता?
क्योंकि केतु को मोक्ष-कारक माना गया है — वह पहले से एक स्थायी भूमिका में है। इसलिए आठ-कारक पद्धति में उसे नहीं रखा जाता। कुछ परंपराएँ सात कारक का भी प्रयोग करती हैं।
दो ग्रह की डिग्री बिल्कुल बराबर हो तो?
यह लगभग कभी नहीं होता, क्योंकि डिग्री दशमलव तक निकाली जाती है। अगर बहुत क़रीब हों तो जन्म के समय पर शक कीजिए — चंद मिनट का फ़र्क क्रम बदल सकता है।
आत्मकारक बदलता है?
नहीं। वह जन्म की कुंडली से बँधा है। जो बदलता है वह गोचर है, चर कारक नहीं।
