वार्षिक राशिफल
साल का पाठ सिर्फ़ धीमे ग्रहों से बनता है — गुरु, शनि, राहु और केतु। तेज़ ग्रह महीने भर में कई बार बदल जाते हैं, इसलिए उनका साल-भर के पाठ में कोई काम नहीं।
अपनी राशि चुनिए
Ye चंद्र राशि है — जन्म के समय चंद्र जिस राशि में था। पाश्चात्य पद्धति की सूर्य-राशि उससे अलग होती है। पता न हो तो फ्री कुंडली से निकाल लीजिए।
इस पाठ में कौन से ग्रह आते हैं
साल के पाठ में सिर्फ़ चार धीमे ग्रह आते हैं — गुरु, शनि, राहु और केतु।
यही चार इतने धीरे चलते हैं कि पूरे साल उनका असर एक दिशा में रहता है। गुरु लगभग एक साल एक राशि में, शनि ढाई साल, राहु और केतु लगभग अढ़ाई साल।
तेज़ ग्रह यहाँ नहीं हैं, और यह चूक नहीं है। चंद्र साल में लगभग 13 बार पूरा चक्कर लगा लेता है — उससे साल भर की कोई बात निकालना गणित के ख़िलाफ़ है।
बारह राशि
अपनी राशि ऊपर चुनिए। शनि का दौर अलग से देखना हो तो हर राशि का अपना पन्ना है:
- मेष की साढ़े साती
- वृषभ की साढ़े साती
- मिथुन की साढ़े साती
- कर्क की साढ़े साती
- सिंह की साढ़े साती
- कन्या की साढ़े साती
- तुला की साढ़े साती
- वृश्चिक की साढ़े साती
- धनु की साढ़े साती
- मकर की साढ़े साती
- कुंभ की साढ़े साती
- मीन की साढ़े साती
Aksar poochhe jaane wale sawaal
वार्षिक राशिफल में सिर्फ़ चार ग्रह क्यों हैं?
क्योंकि सिर्फ़ चार इतने धीरे चलते हैं कि साल भर उनका असर एक दिशा में रहे — गुरु, शनि, राहु और केतु। चंद्र साल में लगभग 13 पूरे चक्कर लगा लेता है; उससे साल भर की कोई बात निकालना गणित के ख़िलाफ़ है।
गुरु का गोचर इतना मायने क्यों रखता है?
क्योंकि गुरु लगभग एक साल एक राशि में रहता है — यानी एक वार्षिक पाठ लगभग पूरा एक गुरु-गोचर होता है। वह जिस भाव में है, साल भर का ज़ोर उसी तरफ़ रहता है।
शनि और साढ़े साती में क्या फ़र्क़ है?
साढ़े साती शनि के गोचर का एक ख़ास हिस्सा है — जब शनि आपकी चंद्र राशि से 12वें, 1ले और 2रे भाव से गुज़रता है। साल भर का शनि गोचर इससे बड़ा है; साढ़े साती उसके भीतर का साढ़े सात साल का दौर है।
साल कब से शुरू माना जाता है?
आज से अगले 365 दिन। यह न 1 January से जुड़ा है न किसी नए वर्ष से — ग्रहों की अपनी चाल ही सीमा तय करती है।
