आज की होरा
होरा आधी रात से नहीं, सूर्योदय से शुरू होती है। दिन के 12 और रात के 12 खंड — इसलिए हर होरा ठीक 60 मिनट की नहीं होती।
यह पन्ना क्या बताता है
यह दिन और रात की चौबीस होरा दिखाता है — हर घंटे का अपना स्वामी ग्रह, और उस स्वामी के हिसाब से वह घंटा किस काम के लिए अनुकूल माना जाता है।
हिसाब कैसे होता है
एक ज़रूरी बात जो अक्सर ग़लत होती है: होरा आधी रात से नहीं, सूर्योदय से शुरू होती है। दिन को 12 बराबर हिस्सों में और रात को भी 12 में बाँटा जाता है — इसलिए दिन की होरा और रात की होरा की लंबाई अलग होती है, और दोनों ठीक एक घंटा नहीं होते। पहली होरा उस वार के स्वामी की होती है (रविवार → सूर्य, सोमवार → चंद्र), और उसके बाद Chaldean क्रम चलता है: शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र।
कैसे पढ़ें
हर होरा के साथ उसका स्वामी दिया जाता है — और असली काम की बात वही है। गुरु की होरा शुभ काम और पढ़ाई के लिए, शुक्र की कला और संबंध के लिए, शनि की धीरज वाले काम के लिए मानी जाती है। होरा छोटे काम के समय के लिए है; बड़े निर्णय के लिए पूरा मुहूर्त देखा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
होरा ठीक एक घंटे की होती है?
नहीं। वह दिन के 12वें हिस्से के बराबर है, और दिन की लंबाई बदलती रहती है। सिर्फ़ विषुव के आस-पास वह एक घंटे के करीब आती है।
आधी रात से गिनने में क्या ग़लती है?
पूरा दिन खिसक जाता है। एक-दो होरा का फ़र्क हर अगली होरा को ग़लत कर देता है — और वह ग़लती दिखती नहीं, क्योंकि तालिका तो भरी हुई ही रहती है।
कौनसी होरा सबसे अच्छी है?
यह काम पर निर्भर है, एक जवाब नहीं है। ग्रह का स्वभाव देखिए — जो काम जिस ग्रह से जुड़ा है, उसकी होरा उस काम के लिए अनुकूल मानी जाती है।
सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं; राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं। यह जानकारी मार्गदर्शन के लिए है, किसी नतीजे का वादा नहीं।
