निःशुल्क जन्म कुंडली — चार्ट, ग्रह और महादशा

आपके जन्म विवरण से असली खगोलीय गणित से बनती कुंडली — 12 भाव का चार्ट (उत्तर और दक्षिण भारतीय), नवमांश (D9), पूरी ग्रह स्थिति, विंशोत्तरी महादशा की समय-रेखा, और मांगलिक–काल सर्प की जाँच। न लॉगिन, न भुगतान — बिल्कुल निःशुल्क

इसे जनम कुंडली, जन्म कुंडली, birth chart या natal chart — जो भी कहिए, चीज़ एक ही है: आपके जन्म के क्षण का आकाश। नाम अलग हैं, गणित वही।

साफ़ बात: यह पन्ना आपकी कुंडली बनाता है। हर भाव और ग्रह का विस्तृत वचन, और आपके चार्ट के हिसाब से रत्न-रुद्राक्ष की सलाह — वह यहाँ नहीं मिलती। वह सलाह बिना कुंडली देखे और बिना बात किए देना ठीक नहीं होता, इसलिए वह काजल शर्मा के साथ की बैठक में ही होती है। कुंडली मिलान पर यह सीमा नहीं है — वह पूरी निःशुल्क है।

जन्म समय जितना पक्का हो, कुंडली उतनी ही सही। लग्न हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश खिसक जाता है — एक घंटे की ग़लती आधी राशि का फ़र्क़ है, और उसके साथ सारे 12 भाव बदल जाते हैं। समय का अंदाज़ा लगाना कुंडली को थोड़ा ग़लत नहीं करता, किसी और की बना देता है। जितना ठीक याद हो, उतना ही भरिए।

दूसरा निःशुल्क साधन

शादी की बात हो तो दोनों की कुंडली का अष्टकूट मिलान अलग जाँच है — 36 गुण, दोष, परिहार और उपाय के साथ। वह पूरा का पूरा निःशुल्क है।

कुंडली मिलान कीजिए
FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या यह कुंडली सचमुच निःशुल्क है?

हाँ। चार्ट (D1 और D9), पूरी ग्रह स्थिति, महादशा की समय-रेखा और दोष जाँच — सब बिना किसी शुल्क के, बिना लॉगिन। हर भाव-ग्रह का विस्तृत वाचन और रत्न की सलाह इस पन्ने पर नहीं है; वह ज्योतिषी के साथ की बैठक में होती है, क्योंकि रत्न की सलाह कुंडली देखे बिना देना ठीक नहीं होता।

जन्म समय पता न हो तो कुंडली बन सकती है?

ग्रहों की राशि फिर भी ठीक रहेगी, पर लग्न और सारे 12 भाव भरोसे लायक नहीं होंगे। लग्न हर 4 मिनट में लगभग 1 अंश खिसकता है, इसलिए समय का अंदाज़ा पूरा चार्ट बदल देता है। पूरा जवाब यहाँ पढ़िए.

यह कुंडली किस पद्धति से बनती है?

पराशरी (वैदिक) पद्धति, लाहिड़ी अयनांश और होल-साइन (राशि और भाव एक ही) भाव पद्धति के साथ। ग्रहों की स्थिति असली खगोलीय गणित से निकाली जाती है, किसी बनी-बनाई तालिका से नहीं। गणित की पूरी जाँच यहाँ पढ़िए.

महादशा क्या बताती है?

विंशोत्तरी दशा 120 साल का चक्र है, जिसमें हर ग्रह को अपना काल मिलता है। यह बताती है कि जीवन के किस दौर में कौन-सा ग्रह मुख्य भूमिका में है। जन्म की महादशा जन्म से पहले ही शुरू हो चुकी होती है, इसलिए पहली दशा अधूरी मिलती है।