चंद्र कला कैलकुलेटर
चंद्र की कला सूर्य और चंद्र के कोण के अंतर से बनती है। 0° पर अमावस्या, 180° पर पूर्णिमा — और तिथि भी इसी अंतर के 12° के टुकड़ों से बनती है।
यह कैलकुलेटर क्या बताता है
यह किसी भी तारीख़ की चंद्र कला बताता है — अमावस्या, पूर्णिमा या बीच की कोई अवस्था — और साथ में रोशनी का प्रतिशत, तिथि, चंद्र राशि और नक्षत्र।
हिसाब कैसे होता है
चंद्र कला सूर्य और चंद्र के कोण के अंतर से बनती है। 0° पर अमावस्या, 180° पर पूर्णिमा। रोशनी उसी अंतर से निकलती है। तिथि भी इसी अंतर के 12° के टुकड़ों से बनती है — इसलिए कला और तिथि हमेशा साथ चलते हैं, दो अलग चीज़ें नहीं हैं।
नतीजा कैसे पढ़ें
रोशनी का प्रतिशत और तिथि एक दूसरे को जाँचते हैं: पूर्णिमा पर रोशनी 100% के पास होनी चाहिए। एक बात जो अक्सर ग़लत समझी जाती है — कला पूरी दुनिया में एक ही क्षण पर एक जैसी होती है। वह सूर्योदय की तरह जगह से नहीं बदलती। सिर्फ़ तारीख़ बदल सकती है, क्योंकि जगह के हिसाब से दिन अलग समय पर शुरू होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तिथि और चंद्र कला में क्या फ़र्क है?
फ़र्क नापने का नहीं, बताने का है। दोनों एक ही अंतर से आते हैं — कला उसे डिग्री में बताती है, तिथि उसे 12° के 30 टुकड़ों में।
जन्म की जगह क्यों नहीं पूछी जाती?
क्योंकि कला जगह पर निर्भर नहीं करती। यह इस कैलकुलेटर की सीमा नहीं, खगोल का तथ्य है।
व्रत की तिथि इससे मिलानी चाहिए?
व्रत के लिए स्थानीय पंचांग देखिए — वहाँ तिथि सूर्योदय के समय से गिनी जाती है, जो जगह से बदलता है। यह पन्ना कला बताता है, व्रत का निर्णय नहीं।
