आज का राहु काल

राहु काल कोई तय घंटा नहीं है। वह दिन के आठ बराबर हिस्सों में से एक है — और दिन की लंबाई हर शहर और हर मौसम में बदलती है। इसीलिए “दोपहर 1:30” जैसा एक ही समय सब जगह सही नहीं हो सकता।

पंचांग बना रहे हैं…

यह पन्ना क्या बताता है

यह आपके शहर का राहु काल बताता है — दिन का वह खंड जिसे शुभ काम शुरू करने के लिए टाला जाता है। साथ में यमगंड और गुलिक काल भी।

हिसाब कैसे होता है

यही वह जगह है जहाँ ज़्यादातर वेबसाइट ग़लती करती हैं। राहु काल दिन का आठवाँ हिस्सा है — और दिन का मतलब है सूर्योदय से सूर्यास्त तक, घड़ी के तय घंटे नहीं। दिन की लंबाई हर जगह और हर मौसम में अलग होती है: दिल्ली में जून में दिन करीब 13½ घंटे का होता है और दिसंबर में 10¼। एक ही “1:30–3:00” दोनों पर सही हो ही नहीं सकता। कौनसा खंड राहु का है, यह वार से तय होता है — रविवार को आठवाँ, सोमवार को दूसरा, और आगे इसी तरह। यह क्रम परंपरा से आया है, गणित से नहीं निकलता।

कैसे पढ़ें

समय आपके चुने हुए शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बना है, इसलिए शहर बदलने पर वह बदलेगा — और वही सही है। परंपरा राहु काल में नया काम शुरू करने से रोकती है, चलते हुए काम से नहीं। और यह एक विचार है, डर की चीज़ नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दूसरी साइट का राहु काल अलग क्यों दिखता है?

दो वजह: या तो वह तय घंटे छाप रही है (जो ग़लत है), या उसका शहर अलग है। सही हिसाब हमेशा आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से ही बनेगा।

राहु काल में सफ़र कर सकते हैं?

परंपरा नया शुभ काम शुरू करने से रोकती है। रोज़ का सफ़र, नौकरी, पढ़ाई — इन पर रोक नहीं है। इसे इतना बड़ा बना देना कि जीवन रुक जाए, परंपरा का आशय नहीं है।

रात का भी राहु काल होता है?

प्रचलित गिनती सिर्फ़ दिन की है — सूर्योदय से सूर्यास्त तक के आठ खंड। इसलिए यहाँ वही दिया जाता है।

सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं; राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं। यह जानकारी मार्गदर्शन के लिए है, किसी नतीजे का वादा नहीं।

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