आज का वार

हर वार का अपना स्वामी ग्रह होता है, और उसी से उस दिन की पहली होरा और चौघड़िया का क्रम तय होता है। वार सिर्फ़ नाम नहीं — पूरे पंचांग का आधार है।

पंचांग बना रहे हैं…

यह पन्ना क्या बताता है

यह आज का वार और उसका स्वामी ग्रह बताता है — पंचांग का दूसरा अंग। साथ में उस वार से जुड़े समय के खंड: राहु काल, चौघड़िया और होरा का क्रम।

हिसाब कैसे होता है

सात वार और उनके स्वामी का क्रम खगोलीय है, मनमाना नहीं: रविवार–सूर्य, सोमवार–चंद्र, मंगलवार–मंगल, बुधवार–बुध, गुरुवार–गुरु, शुक्रवार–शुक्र, शनिवार–शनि। एक ज़रूरी बात: वैदिक गिनती में दिन आधी रात से नहीं, सूर्योदय से शुरू होता है। इसलिए सूर्योदय से पहले का समय अभी भी पिछला वार ही माना जाता है।

कैसे पढ़ें

वार का स्वामी उस पूरे दिन का रंग तय करता है, और उस दिन की पहली होरा भी उसी स्वामी की होती है। राहु काल का खंड भी वार से ही तय होता है, और चौघड़िया का क्रम भी। इसलिए वार सिर्फ़ नाम नहीं है — बाकी तीनों उसी पर टिकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिन सूर्योदय से क्यों शुरू होता है?

क्योंकि वैदिक गिनती का आधार सूरज है, घड़ी नहीं। इसीलिए रात के 2 बजे का समय अभी भी पिछले दिन का ही माना जाता है — और व्रत का निर्णय भी इसी पर चलता है।

कौनसा वार किस काम के लिए अच्छा है?

स्वामी ग्रह देखिए — गुरुवार पढ़ाई और शुभ काम के लिए, शुक्रवार कला और संबंध के लिए, शनिवार धीरज वाले काम के लिए माना जाता है। पर वार अकेला मुहूर्त नहीं है।

अंग्रेज़ी और हिंदू वार एक ही हैं?

हाँ, दोनों एक ही सात-दिन के चक्कर पर चलते हैं और स्वामी ग्रह भी वही हैं — Sunday/सूर्य, Monday/चंद्र, और आगे। फ़र्क सिर्फ़ दिन कब शुरू होता है, उसका है।

सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं; राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं। यह जानकारी मार्गदर्शन के लिए है, किसी नतीजे का वादा नहीं।

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