आज का करण

करण तिथि का आधा भाग है — एक तिथि में दो करण आते हैं। साथ के चार और अंग भी नीचे पूरे दिए गए हैं।

पंचांग बना रहे हैं…

यह पन्ना क्या बताता है

यह आज का करण बताता है — पंचांग का पाँचवाँ अंग, और सबसे कम समझा जाने वाला। करण तिथि का आधा हिस्सा होता है।

हिसाब कैसे होता है

वही सूर्य-चंद्र का अंतर, पर इस बार 6° के टुकड़ों में — यानी एक तिथि (12°) के दो करण। पूरे चक्कर में 60 करण बनते हैं, पर नाम सिर्फ़ ग्यारह हैं। सात चर (चलते) करण — बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि — जो आठ बार दोहराते हैं, और चार स्थिर — शकुनि, चतुष्पद, नाग और किंस्तुघ्न — जो चक्कर में एक ही बार आते हैं।

कैसे पढ़ें

करण के साथ उसके बदलने का समय भी है। सबसे ज़्यादा चर्चा विष्टि (भद्रा) की होती है — परंपरा उस दौरान शुभ काम शुरू करने से रोकती है। बाकी करण अलग-अलग कामों के लिए अनुकूल माने जाते हैं। पर करण अकेला किसी काम का फ़ैसला नहीं है; वह पंचांग के पाँच अंगों में से एक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एक दिन में कितने करण होते हैं?

आम तौर पर दो, क्योंकि एक तिथि के दो करण होते हैं। पर तिथि और दिन की लंबाई अलग होने से कभी तीन भी छू सकते हैं।

विष्टि या भद्रा कितनी बुरी है?

परंपरा उस समय नया शुभ काम शुरू करने से रोकती है — बस। वह हर महीने कई बार आता है, इसलिए उसे आपदा मान लेना परंपरा का आशय नहीं है।

चार करण सिर्फ़ एक बार क्यों आते हैं?

क्योंकि 60 में से 56 खंड सात चर करणों के आठ दोहराव से भर जाते हैं, और बचे चार खंड पर ये स्थिर करण बैठते हैं — अमावस्या के आस-पास।

सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं; राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं। यह जानकारी मार्गदर्शन के लिए है, किसी नतीजे का वादा नहीं।

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