आज का पंचांग

पंचांग का हर समय आपके शहर के सूर्योदय से नापा जाता है — घड़ी के तय घंटों से नहीं। इसीलिए दिल्ली और चेन्नई का राहु काल एक ही दिन में अलग होता है।

पंचांग बना रहे हैं…

यह पन्ना क्या बताता है

यह आपके शहर का पूरा पंचांग है — पाँचों अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। साथ में सूर्योदय-सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया, होरा और अभिजित मुहूर्त।

हिसाब कैसे होता है

“पंचांग” का मतलब ही है पाँच अंग। तिथि सूर्य और चंद्र के कोण के अंतर से बनती है (हर 12° का एक टुकड़ा); नक्षत्र चंद्र की स्थिति से; योग दोनों के जोड़ से; करण तिथि के आधे हिस्से से; और वार दिन से। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं — आपके चुने हुए शहर के अक्षांश-देशांतर पर। राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं।

कैसे पढ़ें

हर खंड के साथ उसका समय है, और वह आपके शहर का है — इसलिए दूसरे शहर का पंचांग अलग आएगा, और वही सही है। तिथि और नक्षत्र दिन में बदल सकते हैं, इसलिए उनके साथ बदलने का समय भी दिया जाता है। सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है; आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचांग हर शहर का अलग क्यों होता है?

क्योंकि उसकी नींव सूर्योदय है, और वह हर जगह अलग समय पर होता है। एक ही पंचांग पूरे देश पर लगाना ग़लत है।

दो पंचांग में तिथि अलग क्यों लिखी होती है?

तिथि दिन के बीच बदलती है। कुछ परंपराएँ सूर्योदय के समय वाली तिथि गिनती हैं, कुछ उस क्षण की — इसलिए गिनती का तरीक़ा अलग हो तो जवाब भी अलग आएगा।

जहाँ सूरज नहीं उगता वहाँ क्या होगा?

ध्रुवों के पास कुछ दिनों में सूरज उगता या डूबता ही नहीं। वहाँ यह पन्ना साफ़ कह देता है कि आज समय निकालना संभव नहीं — झूठा समय नहीं गढ़ता।

सारा गणित इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर और तारीख़ कहीं भेजी नहीं जाती। सूर्योदय और सूर्यास्त खगोल गणित से निकलते हैं; राहु काल, चौघड़िया और होरा उन्हीं पर टिके परंपरा के खंड हैं। यह जानकारी मार्गदर्शन के लिए है, किसी नतीजे का वादा नहीं।

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दूसरे ग्रहों का गोचर

सूर्य चंद्र मंगल बुध गुरु शुक्र शनि राहु केतु

पंचांग के हिस्से — अलग-अलग

कल का पंचांग राहु काल चौघड़िया होरा तिथि करण वार