विवाह मुहूर्त
विवाह का मुहूर्त सबसे कड़े नियमों से गुज़रता है — चातुर्मास, खरमास और गुरु-शुक्र का अस्त भी देखा जाता है। इसीलिए साल भर में इतने कम दिन बचते हैं।
हर दिन के साथ “यह दिन क्यों चुना गया” खोल कर देखिए — उसमें हर नियम का नाम और उसका मान दिया है, ताकि आप इसे अपने पंचांग से मिला सकें। जो गणना जाँची न जा सके, वह भरोसे के लायक नहीं होती।
सारा हिसाब इसी ब्राउज़र में होता है — आपका शहर कहीं भेजा नहीं जाता।
यह पन्ना क्या बताता है
यह विवाह के शुभ दिन बताता है — आपके शहर के लिए, और हर दिन के साथ यह भी कि वह दिन किस आधार पर चुना गया।
दिन कैसे चुना जाता है
विवाह पर सबसे ज़्यादा जाँच लगती हैं। शुभ नक्षत्र ग्यारह माने गए हैं — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। वार सोम, बुध, गुरु और शुक्र। रिक्ता तिथि (4, 9, 14) और अमावस्या हटा दी जाती हैं। इसके अलावा तीन बड़े दौर छोड़े जाते हैं: चातुर्मास, खरमास (जब सूर्य धनु या मीन में हो), और गुरु या शुक्र का अस्त — बिना इनके विवाह का मुहूर्त अधूरा माना जाता है।
नतीजा कैसे पढ़ें
एक बात परंपरा में बँटी हुई है और वह यहाँ छुपाई नहीं गई: कुछ परंपराएँ पूर्णिमा को विवाह के लिए ठीक मानती हैं और कुछ नहीं। यहाँ उसे नहीं लिया गया, क्योंकि जो बहुमत में है वही सुरक्षित है। और ये सामान्य दिन हैं — असली विवाह मुहूर्त में वर और वधू दोनों की कुंडली, चंद्र की स्थिति और चंद्राष्टम देखा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुरु या शुक्र का अस्त क्या है?
जब ये ग्रह सूर्य के बहुत पास आ जाते हैं तो उनकी चमक छुप जाती है — उसे अस्त कहते हैं। परंपरा उस दौर में विवाह नहीं करती, क्योंकि दोनों ग्रह विवाह के मुख्य कारक माने गए हैं।
चातुर्मास में विवाह क्यों नहीं होता?
चातुर्मास में विष्णु का शयन-काल माना जाता है। यह धार्मिक-सामाजिक रिवाज़ है, खगोल गणित का नियम नहीं — पर वह इतना व्यापक है कि उसे छोड़ना ही सुरक्षित है।
मेरे पंडित जी का दिन यहाँ नहीं दिख रहा?
हो सकता है। वे आपकी कुंडली देख कर कह रहे हैं, और यह सामान्य जाँच है। उन पर भरोसा कीजिए — यह पन्ना उनकी जगह लेने के लिए नहीं है।
