साप्ताहिक राशिफल
हफ़्ते के पाठ में चंद्र जान-बूझकर नहीं है। चंद्र सवा दो दिन में राशि बदल देता है — उसे साप्ताहिक पाठ में डालना पाठक से झूठ बोलना है। यहाँ वही ग्रह आते हैं जो पूरे हफ़्ते टिकते हैं।
अपनी राशि चुनिए
Ye चंद्र राशि है — जन्म के समय चंद्र जिस राशि में था। पाश्चात्य पद्धति की सूर्य-राशि उससे अलग होती है। पता न हो तो फ्री कुंडली से निकाल लीजिए।
इस पाठ में कौन से ग्रह आते हैं
हफ़्ते के पाठ में चार ग्रह आते हैं — सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल। ये चारों पूरे हफ़्ते लगभग एक ही जगह टिकते हैं।
चंद्र यहाँ जान-बूझकर नहीं है। वह सात दिन में तीन राशि पार कर जाता है — उससे साप्ताहिक पाठ बनाना पाठक से झूठ बोलना है, क्योंकि जिस दिन वह पढ़ेगा उस दिन चंद्र कहीं और होगा।
धीमे ग्रह — गुरु, शनि, राहु, केतु — भी यहाँ नहीं हैं। एक हफ़्ते में वे हिलते ही नहीं, इसलिए उनसे हफ़्ते का कोई फ़र्क़ नहीं बनता।
बारह राशि
अपनी राशि ऊपर चुनिए। शनि का दौर अलग से देखना हो तो हर राशि का अपना पन्ना है:
- मेष की साढ़े साती
- वृषभ की साढ़े साती
- मिथुन की साढ़े साती
- कर्क की साढ़े साती
- सिंह की साढ़े साती
- कन्या की साढ़े साती
- तुला की साढ़े साती
- वृश्चिक की साढ़े साती
- धनु की साढ़े साती
- मकर की साढ़े साती
- कुंभ की साढ़े साती
- मीन की साढ़े साती
Aksar poochhe jaane wale sawaal
साप्ताहिक राशिफल में चंद्र क्यों नहीं है?
क्योंकि वह सात दिन में तीन राशि पार कर जाता है। चंद्र से बनाया गया साप्ताहिक पाठ जिस दिन लिखा जाता है उसी दिन तक सच रहता है। इसलिए यहाँ सिर्फ़ वे ग्रह हैं जो पूरे हफ़्ते लगभग एक जगह टिकते हैं — सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल।
हफ़्ता कब से कब तक गिना जाता है?
आज से अगले सात दिन। कोई तय “सोमवार से रविवार” नहीं, क्योंकि ग्रह कैलंडर नहीं देखते। आप जिस दिन खोलेंगे, गिनती उसी दिन से शुरू होगी।
क्या हर हफ़्ते पाठ बदलेगा?
उतना ही जितना ग्रह बदलें। बुध और शुक्र कुछ हफ़्तों में राशि बदल देते हैं, और तब पाठ साफ़ अलग होता है। जब चारों ग्रह अपनी जगह पर रहते हैं, दो हफ़्तों का पाठ मिलता-जुलता रहेगा — और वह झूठ नहीं, वही सच है।
इसमें वक्री ग्रह दिखते हैं?
हाँ। कोई ग्रह वक्री हो तो वह अलग से बताता है, क्योंकि वक्री अवस्था में उसी ग्रह के काम दोबारा सामने आते हैं — नए काम कम।
