मांगलिक दोष के उपाय
उपाय की बात तभी शुरू होनी चाहिए जब यह पक्का हो जाए कि दोष सचमुच लग रहा है। और ज़्यादातर कुंडलियों पर कोई न कोई छूट लग जाती है।
पहला उपाय: जाँचिए कि दोष है भी या नहीं
यह मज़ाक नहीं है। बहुत से लोग जिस दोष का उपाय करवा रहे होते हैं, उनकी कुंडली पर पारंपरिक छूट लगती है — उन्हें बस वह बताई नहीं गई।
जाँचने का तरीका → · छूटों की पूरी सूची →
परंपरा में जो उपाय बताए गए हैं
1. मंगल का मंत्र
“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” — पारंपरिक रूप से मंगलवार को 108 बार। कोई खर्च नहीं, आप स्वयं कर सकते हैं।
2. हनुमान जी की उपासना
मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड। परंपरा में यह मंगल की ऊर्जा शांत करने का सबसे आम और सबसे सरल उपाय है।
3. दान और सेवा
मंगलवार को मसूर दाल, गुड़, लाल वस्त्र का दान। ज़रूरतमंद की मदद।
4. मूंगा (Red Coral) — सावधानी के साथ
मूंगा मंगल का रत्न है। पर मांगलिक होने का मतलब मूंगा पहनना नहीं होता। कई स्थितियों में वह उल्टा काम करता है — रत्न मंगल की भाव-स्थिति और दशा देखकर तय होता है। रत्न कैसे चुना जाता है →
5. कुंभ विवाह
एक पारंपरिक प्रथा जिसमें प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। यह कई परंपराओं में है। पर इसे ज़रूरी बताकर दबाव बनाना गलत है — खास कर तब जब छूटें पहले से लग रही हों।
- कि मांगलिक व्यक्ति किसी के लिए खतरा है
- कि बिना उपाय के विवाह नहीं होना चाहिए
- कि किसी के भाग्य में किसी का कष्ट लिखा है
- कि हर साल दोबारा महँगी पूजा करानी पड़ेगी
मांगलिक दोष निवारण पूजा की जानकारी →
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मांगलिक दोष का सबसे अच्छा उपाय क्या है?
परंपरा में मंगल का मंत्र, मंगलवार को हनुमान जी की उपासना, और दान प्रमुख उपाय हैं — तीनों में कोई खर्च नहीं। पर पहला कदम हमेशा यह है कि दोष सचमुच लग रहा है या उस पर छूट है।
क्या मांगलिक को मूंगा पहनना चाहिए?
ज़रूरी नहीं। मांगलिक होना और मूंगा पहनना दो अलग बातें हैं। रत्न मंगल की स्थिति और दशा देखकर तय होता है; कई स्थितियों में मूंगा उल्टा काम करता है।
क्या कुंभ विवाह ज़रूरी है?
यह एक पारंपरिक प्रथा है, एक अनिवार्य नियम नहीं। और अगर कुंडली पर पहले से छूटें लग रही हैं, तो उसका सवाल ही नहीं उठता।
क्या मांगलिक और गैर-मांगलिक की शादी हो सकती है?
हाँ, और करोड़ों ऐसी शादियाँ चल रही हैं। ज़्यादातर कुंडलियों पर कोई न कोई पारंपरिक छूट लग जाती है।
