मांगलिक दोष की छूटें (परिहार)
यह इस पूरे विषय का सबसे कम बताया जाने वाला हिस्सा है — और सबसे ज़्यादा काम का। जिन ग्रंथों से यह दोष निकाला जाता है, उन्हीं में इसकी छूटें भी लिखी हैं। और वे लगभग हमेशा लग जाती हैं।
जो चीज़ चालीस प्रतिशत लोगों में हो, वह श्राप नहीं हो सकती।
पारंपरिक छूटें — पूरी सूची
| छूट | मतलब |
|---|---|
| मंगल अपनी राशि में | मेष या वृश्चिक में मंगल हो |
| मंगल उच्च में | मकर राशि में |
| सिंह या कुंभ में | कई परंपराएँ इसे छूट मानती हैं |
| गुरु की दृष्टि | मंगल पर गुरु देख रहा हो — सबसे मानी हुई छूट |
| दोनों पक्ष मांगलिक | लड़का और लड़की दोनों — परंपरा कहती है दोष कट जाता है |
| चंद्र केंद्र में | चंद्र 1, 4, 7 या 10वें भाव में |
| 28 साल के बाद | कई परंपराएँ कहती हैं कि उस उम्र के बाद यह काम नहीं करता |
यानी जिन लोगों ने यह दोष लिखा, उन्होंने ही लिखा कि वह ज़्यादातर स्थितियों में नहीं लगता।
ये छूटें बताई क्यों नहीं जातीं
इसका जवाब सीधा है और सुनने में कड़वा: दोष बताने पर काम मिलता है, छूट बताने पर नहीं।
एक व्यक्ति जिसे बताया गया कि वह मांगलिक है, वह उपाय, पूजा और रत्न ख़रीदता है। एक व्यक्ति जिसे बताया गया कि उस पर छूट लग रही है, वह धन्यवाद कहकर चला जाता है।
एक असली मामला
29 साल की एक client, दो रिश्ते टूट चुके थे। उन्हें बताया गया था कि वे मांगलिक हैं और उनके भाग्य में पति को कष्ट है।
उनकी कुंडली: मंगल 8वें भाव में — तकनीकी रूप से मांगलिक। पर मंगल वृश्चिक में था, अपनी ही राशि, और उस पर गुरु की दृष्टि थी।
दो छूटें, दोनों ग्रंथों में लिखी हुई। यानी जिन ग्रंथों से यह दोष निकाला जाता है, उन्हीं के हिसाब से उन पर यह लगता ही नहीं था।
कुंडली मिलान और गुण — एक साफ़ बात
36 गुण वाला अष्टकूट मिलान परंपरा का अपना तंत्र है। दो ईमानदार बातें:
- 36 में से 8 अंक सिर्फ़ नाड़ी के होते हैं, और वे लगभग हमेशा या 0 या 8 आते हैं — इसलिए एक ही चीज़ से score बहुत गिर जाता है
- गुण दो व्यक्ति नहीं देखते, उनके नक्षत्र देखते हैं — दो बिल्कुल अलग लोग एक ही नक्षत्र में पैदा हो सकते हैं
इसलिए कम गुण पर शादी रोकना ग़लत है, और यह बात परिवार को बतानी चाहिए।
आगे: अगर छूट न लगे तो परंपरा कौन-से उपाय बताती है →
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मांगलिक दोष कब नहीं लगता?
जब मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च (मकर) में हो, सिंह/कुंभ में हो, उस पर गुरु की दृष्टि हो, दोनों पक्ष मांगलिक हों, चंद्र केंद्र में हो — या कई परंपराओं के हिसाब से 28 साल की उम्र के बाद।
क्या दोनों मांगलिक हों तो दोष ख़त्म हो जाता है?
परंपरा यही कहती है — यह सबसे ज़्यादा मानी जाने वाली छूटों में से एक है।
28 साल के बाद मांगलिक दोष ख़त्म हो जाता है?
कई परंपराएँ ऐसा मानती हैं। यह एकमत नियम नहीं है, पर यह उन छूटों में है जो ग्रंथों में मिलती हैं।
कम गुण आने पर शादी नहीं करनी चाहिए?
गुण एक ढाँचा है, फ़ैसला नहीं। वह नक्षत्र नापता है, दो लोगों का आपसी व्यवहार नहीं। कम गुण पर शादी रोकना इस तंत्र का ग़लत इस्तेमाल है।
