पुनर्वसु नक्षत्र

नीचे का हर अंक गणना से आया है, किसी किताब से नक़ल नहीं किया गया — वही इंजन जो इस साइट का कुंडली-मिलान चलाता है.

एक नज़र में

विस्तार: 80°00' – 93°20' · नक्षत्र स्वामी: गुरु
राशि: मिथुन, कर्क
देवता: अदिति · प्रतीक: तरकश

चार पाद — कौन-सा पाद किस राशि में

पादअंशराशिराशि स्वामी
180°00' – 83°20'मिथुनबुध
283°20' – 86°40'मिथुनबुध
386°40' – 90°00'मिथुनबुध
490°00' – 93°20'कर्कचंद्र

शास्त्रीय गुण

योनिमार्जार (बिल्ली), मादा
गणदेव
नाड़ीआदि नाड़ी
रज्जुनाभि रज्जु
वेधपूर्व फाल्गुनी

नाभि रज्जु — एक ही रज्जु के दो जातकों का मिलान शास्त्र में टाला जाता है; बताया गया असर: santaan-sukh me baadha.

मिलान — सबसे अनुकूल और सबसे कमज़ोर

सबसे अनुकूल: पुष्य (19 / 21) · स्वाति (19 / 21) · अनुराधा (19 / 21) · उत्तर भाद्रपद (19 / 21) · रोहिणी (18.5 / 21)
सबसे कमज़ोर: मूल (3.5 / 21) · ज्येष्ठा (3.5 / 21) · शतभिषा (5 / 21) · हस्त (9.5 / 21) · उत्तर फाल्गुनी (9.5 / 21)

सभी 27 नक्षत्रों के साथ अंक

नक्षत्रतारायोनिगणनाड़ीकुल
अश्विनी1.5/32/46/60/89.5/21
भरणी1.5/32/46/68/817.5/21
कृत्तिका1.5/32/40/68/811.5/21
रोहिणी1.5/33/46/68/818.5/21
मृगशिरा1.5/33/46/68/818.5/21
आर्द्रा3/32/46/60/811/21
पुनर्वसु3/34/46/60/813/21
पुष्य3/32/46/68/819/21
आश्लेषा1.5/34/40/68/813.5/21
मघा1.5/30/40/68/89.5/21
पूर्व फाल्गुनी1.5/30/46/68/815.5/21
उत्तर फाल्गुनी1.5/32/46/60/89.5/21
हस्त1.5/32/46/60/89.5/21
चित्रा1.5/32/40/68/811.5/21
स्वाति3/32/46/68/819/21
विशाखा3/32/40/68/813/21
अनुराधा3/32/46/68/819/21
ज्येष्ठा1.5/32/40/60/83.5/21
मूल1.5/32/40/60/83.5/21
पूर्वाषाढ़ा1.5/32/46/68/817.5/21
उत्तराषाढ़ा1.5/32/46/68/817.5/21
श्रवण1.5/32/46/68/817.5/21
धनिष्ठा1.5/32/40/68/811.5/21
शतभिषा3/32/40/60/85/21
पूर्व भाद्रपद3/32/46/60/811/21
उत्तर भाद्रपद3/32/46/68/819/21
रेवती1.5/32/46/68/817.5/21

ये अंक कैसे निकले — और क्या नहीं बताते

ऊपर के अंक अष्टकूट (उत्तर भारतीय / पराशरी) पद्धति से हैं. 36 अंकों में से सिर्फ़ चार कूट नक्षत्र से तय होते हैं — तारा 3, योनि 4, गण 6, नाड़ी 8 — कुल 21. यही इस पन्ने पर हैं.

बाकी 15 अंक — वर्ण 1, वश्य 2, ग्रह मैत्री 5, भकूट 7 — चंद्र राशि से आते हैं. एक ही नक्षत्र के चार पाद दो अलग राशियों में पड़ सकते हैं (जैसे कृत्तिका का पहला पाद मेष में, बाकी तीन वृषभ में). इसलिए "इस नक्षत्र के साथ पूरे 36 में से इतने अंक" जैसा दावा नक्षत्र के नाम पर हो ही नहीं सकता — वह जन्म-विवरण माँगता है.

यह बात हर बार जाँची जाती है: पन्ना बनाते समय हर जोड़े का 21-अंक दो अलग पादों पर निकाला जाता है, और दोनों बराबर न हों तो पन्ना बनता ही नहीं.

अष्टकूट के अंक मिलान का एक पहलू हैं, फ़ैसला नहीं. मंगल दोष, दोनों कुंडलियों की दशा और सप्तम भाव — ये अलग जाँच माँगते हैं.

अपनी असली कुंडली से पूरा मिलान देखिए
यह पन्ना सिर्फ़ नक्षत्र से तय होने वाले 21 अंक दिखाता है. बाकी 15 अंक चंद्र-राशि से आते हैं, जो जन्म-विवरण के बिना पता नहीं चलती.
कुंडली मिलान कीजिए

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