पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र
नीचे का हर अंक गणना से आया है, किसी किताब से नक़ल नहीं किया गया — वही इंजन जो इस साइट का कुंडली-मिलान चलाता है.
एक नज़र में
राशि: सिंह
देवता: भग · प्रतीक: खाट के अगले पाए
चार पाद — कौन-सा पाद किस राशि में
| पाद | अंश | राशि | राशि स्वामी |
|---|---|---|---|
| 1 | 133°20' – 136°40' | सिंह | सूर्य |
| 2 | 136°40' – 140°00' | सिंह | सूर्य |
| 3 | 140°00' – 143°20' | सिंह | सूर्य |
| 4 | 143°20' – 146°40' | सिंह | सूर्य |
शास्त्रीय गुण
| योनि | मूषक (चूहा), मादा |
|---|---|
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | मध्य नाड़ी |
| रज्जु | कंठ रज्जु |
| वेध | पुनर्वसु |
कंठ रज्जु — एक ही रज्जु के दो जातकों का मिलान शास्त्र में टाला जाता है; बताया गया असर: aayu aur swasthya — vishesh roop se kanya ke liye batlaya gaya.
मिलान — सबसे अनुकूल और सबसे कमज़ोर
सभी 27 नक्षत्रों के साथ अंक
| नक्षत्र | तारा | योनि | गण | नाड़ी | कुल |
|---|---|---|---|---|---|
| अश्विनी | 3/3 | 2/4 | 5/6 | 8/8 | 18/21 |
| भरणी | 3/3 | 2/4 | 6/6 | 0/8 | 11/21 |
| कृत्तिका | 3/3 | 2/4 | 0/6 | 8/8 | 13/21 |
| रोहिणी | 1.5/3 | 2/4 | 6/6 | 8/8 | 17.5/21 |
| मृगशिरा | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 0/8 | 8.5/21 |
| आर्द्रा | 1.5/3 | 2/4 | 6/6 | 8/8 | 17.5/21 |
| पुनर्वसु | 1.5/3 | 0/4 | 5/6 | 8/8 | 14.5/21 |
| पुष्य | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 0/8 | 8.5/21 |
| आश्लेषा | 1.5/3 | 0/4 | 0/6 | 8/8 | 9.5/21 |
| मघा | 3/3 | 4/4 | 0/6 | 8/8 | 15/21 |
| पूर्व फाल्गुनी | 3/3 | 4/4 | 6/6 | 0/8 | 13/21 |
| उत्तर फाल्गुनी | 3/3 | 2/4 | 6/6 | 8/8 | 19/21 |
| हस्त | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 8/8 | 16.5/21 |
| चित्रा | 1.5/3 | 2/4 | 0/6 | 0/8 | 3.5/21 |
| स्वाति | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 8/8 | 16.5/21 |
| विशाखा | 1.5/3 | 2/4 | 0/6 | 8/8 | 11.5/21 |
| अनुराधा | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 0/8 | 8.5/21 |
| ज्येष्ठा | 1.5/3 | 2/4 | 0/6 | 8/8 | 11.5/21 |
| मूल | 3/3 | 2/4 | 0/6 | 8/8 | 13/21 |
| पूर्वाषाढ़ा | 3/3 | 2/4 | 6/6 | 0/8 | 11/21 |
| उत्तराषाढ़ा | 3/3 | 2/4 | 6/6 | 8/8 | 19/21 |
| श्रवण | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 8/8 | 16.5/21 |
| धनिष्ठा | 1.5/3 | 3/4 | 0/6 | 0/8 | 4.5/21 |
| शतभिषा | 1.5/3 | 2/4 | 0/6 | 8/8 | 11.5/21 |
| पूर्व भाद्रपद | 1.5/3 | 3/4 | 6/6 | 8/8 | 18.5/21 |
| उत्तर भाद्रपद | 1.5/3 | 2/4 | 6/6 | 0/8 | 9.5/21 |
| रेवती | 1.5/3 | 2/4 | 5/6 | 8/8 | 16.5/21 |
ये अंक कैसे निकले — और क्या नहीं बताते
ऊपर के अंक अष्टकूट (उत्तर भारतीय / पराशरी) पद्धति से हैं. 36 अंकों में से सिर्फ़ चार कूट नक्षत्र से तय होते हैं — तारा 3, योनि 4, गण 6, नाड़ी 8 — कुल 21. यही इस पन्ने पर हैं.
बाकी 15 अंक — वर्ण 1, वश्य 2, ग्रह मैत्री 5, भकूट 7 — चंद्र राशि से आते हैं. एक ही नक्षत्र के चार पाद दो अलग राशियों में पड़ सकते हैं (जैसे कृत्तिका का पहला पाद मेष में, बाकी तीन वृषभ में). इसलिए "इस नक्षत्र के साथ पूरे 36 में से इतने अंक" जैसा दावा नक्षत्र के नाम पर हो ही नहीं सकता — वह जन्म-विवरण माँगता है.
यह बात हर बार जाँची जाती है: पन्ना बनाते समय हर जोड़े का 21-अंक दो अलग पादों पर निकाला जाता है, और दोनों बराबर न हों तो पन्ना बनता ही नहीं.
अष्टकूट के अंक मिलान का एक पहलू हैं, फ़ैसला नहीं. मंगल दोष, दोनों कुंडलियों की दशा और सप्तम भाव — ये अलग जाँच माँगते हैं.
यह पन्ना सिर्फ़ नक्षत्र से तय होने वाले 21 अंक दिखाता है. बाकी 15 अंक चंद्र-राशि से आते हैं, जो जन्म-विवरण के बिना पता नहीं चलती.
कुंडली मिलान कीजिए
